Uttarakhand Darshan -एक बार आयें बार-2 आयेगें

  • Home
  • India
  • Rishikesh
  • Uttarakhand Darshan -एक बार आयें बार-2 आयेगें

Uttarakhand Darshan -एक बार आयें बार-2 आयेगें गंगोत्री यमनोत्री बद्री केदार-मनोहर ?

Rishikesh वन भूमि पर बसे हजारों परिवार 22/12/2025 को आए उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद बहुत परेशान है जो बीस से चालीस ...
12/01/2026

Rishikesh वन भूमि पर बसे हजारों परिवार 22/12/2025 को आए उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद बहुत परेशान है जो बीस से चालीस वर्षों से यहां विधिवत् बसे हुए हैं उत्तराखंड शासन ने कोर्ट के अनुसार अतिक्रमित भूमि मानते हुए अब यहां नए बिजली पानी के कनेक्शनों पर और पुराने कनेक्शन के ट्रांसफर पर पूर्णतया रोक लगा दी है। क्षेत्रवासियों की जान sansat में पड़ी है और रातों की नींद हराम हो गई है
अब बस एक सहारा मां पीतांबरा मां बगलामुखी का है

माँ बगलामुखी "स्तंभन" की अधिष्ठात्री हैं, वे विपरीत निर्णयों और प्रतिकूल परिस्थितियों को रोकने की शक्ति रखती हैं।
"सभी निर्दोष परिवारों के आश्रय की रक्षा हो" – इस निस्वार्थ भाव से प्रार्थना करें। सामूहिक संकल्प और प्रार्थना भी करें।
चूंकि यह विषय वन भूमि का है
प्रभावित क्षेत्र के लोग मिलकर बेसहारा या वन में चरने वाली बद्रीश गौमाता की सेवा का संकल्प लें।
​गौमाता के चरणों की धूल (रज) का तिलक लगाएं, यह विजय का प्रतीक माना जाता है।
इस कठिन समय में मानसिक और आध्यात्मिक संबल प्रदान करने की भी आवश्यकता है।
क्योंकि दुर्बल हृदय के व्यक्ति अधिक मानसिक भार ले जाते हैं।
समस्या आई है तो समाधान भी निश्चित ही कहीं न कहीं छिपा ही है
माँ पीतांबरा की शरण ही एकमात्र मार्ग दिखाई देती है। शत्रु और बाधाओं का स्तंभन करने वाली माँ बगलामुखी ही इस संकट (विपदा) के दमन का सामर्थ्य रखती हैं।
*इस संकट के समय मां पीतांबरा मां बगलामुखी सभी सभी क्षेत्रवासियों को मानसिक बल बुद्धि प्रदान करें और इस चक्रव्यूह से बाहर निकलें*
डॉ मनोज शर्मा
सनातन विद्या परिषद्, सनातन शक्तिपीठम

11/01/2026

यात्रा विज्ञान
सनातन धर्म में तीर्थयात्रा केवल देशाटन नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
​१. तीर्थ का अर्थ एवं महिमा (महाभारत एवं पुराण)
​महाभारत के वनपर्व में तीर्थ की महिमा बताते हुए कहा गया है:
​यथा शरीरस्य उद्देशा: केचिन्मेध्यतमा: स्मृता:।
तथा पृथिव्या उद्देशा: केचित् पुण्यतमा: स्मृता:॥
(महाभारत, वनपर्व ८२/१३-१४)
​अर्थात्: जैसे शरीर के कुछ अंग अधिक पवित्र माने जाते हैं, वैसे ही पृथ्वी के कुछ स्थान (जल, तेज और ऋषियों के तप के प्रभाव से) अत्यंत पुण्यमय होते हैं।
​२. तीर्थ फल प्राप्ति के अनिवार्य लक्षण (स्कन्द पुराण)
​मात्र शरीर से तीर्थ पहुँच जाना पर्याप्त नहीं है। स्कन्द पुराण के काशी खंड में स्पष्ट किया गया है:
​क्षमा धृतिरहिंसा च शौचमिन्द्रियनिग्रह:।
एतानि मानसान्याहुस्तीर्थानि मुनिसत्तमा:॥
​अर्थात्: क्षमा, धैर्य, अहिंसा, पवित्रता और इंद्रिय निग्रह—ये 'मानस तीर्थ' हैं। जिसके पास ये नहीं, उसे बाहरी तीर्थ का फल नहीं मिलता।
​३. यात्रा की तैयारी और संकल्प
​शास्त्रों के अनुसार यात्रा से पूर्व घर पर गणेश पूजन, पितृ तर्पण और सात्विक आहार का संकल्प लेना चाहिए।
​सदमार्ग सूत्र: तीर्थयात्रा पर निकलने से पहले अपने आहार की शुद्धि सुनिश्चित करें। "फैमिली डॉक्टर नहीं, फैमिली किसान ढूंढिए" ताकि यात्रा के दौरान और पश्चात आपका शरीर और मन सात्विक बना रहे।
​४. पदयात्रा का महत्व (ऐतरेय ब्राह्मण)
​सवारी की अपेक्षा पैदल यात्रा का फल अधिक बताया गया है:
​चरैवेति चरैवेति!
(ऐतरेय ब्राह्मण)
​पैदल चलने से प्रत्येक पद पर अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। यह शारीरिक तपस्या का एक रूप है।
​५. तीर्थ में गौ-सेवा और प्रकृति संरक्षण
​तीर्थों की रक्षा का अर्थ है वहां के पर्यावरण और देशी भारतीय गौवंश (Desi Bhartiya Govansh) की रक्षा।
​गौविज्ञान: ऋषिकेश (सनातन विज्ञान भवन) और नरवाना (सनातन शक्तिपीठम) के सिद्धांतों के अनुसार, तीर्थ यात्रा तभी सफल है जब हम वहां के प्राकृतिक स्रोतों को प्रदूषित न करें और स्वतंत्र विचरण करने वाली गौमाताओं की सेवा करें।
​६. मुंडन और त्याग का प्रतीक
​गङ्गाजी या प्रयाग जैसे तीर्थों में केश त्याग (मुंडन) का विधान है:
​सार्धत्रिकोटी तीर्थानि वसन्ति नखलोमसु।
तस्मात् मुण्डनं कार्यं तीर्थेष्वागतमानवै:॥
​हमारे पापों का आश्रय केशों में होता है, अतः उनका त्याग अहंकार के त्याग का प्रतीक है।
​सदमार्ग परिवार: तीर्थ और जीवन के पंचप्राण
​डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार, किसी भी तीर्थ की यात्रा करते समय इन पाँच सूत्रों का पालन व्यक्ति को 'सदमार्ग' पर ले जाता है:
​ईश्वर निष्ठा: केवल मनोकामना के लिए नहीं, आत्म-कल्याण के लिए यात्रा करें।
​गौ-निष्ठा: तीर्थ में देशी भारतीय गौवंश (जो रस्सियों से मुक्त हो) के दर्शन और सेवा करें।
​आहार शुद्धि: रसायनों से मुक्त भोजन ही मंत्रों की शक्ति को सक्रिय करता है।
​संस्कार: सनातन विद्या परिषद के अनुसार अपनी संस्कृति का गौरव बनाए रखें।
​सेवा: तीर्थ में आए दरिद्र और ब्राह्मण की परीक्षा न करें, यथाशक्ति दान दें।
​सचिव

*क्या आप सनातनियों को लॉर्ड मैकाले के सनातन विरोधी कुचक्र स्कूलिंग एजुकेशन माफिया से और हेल्थ/ फार्मा माफिया के जंजाल से...
23/12/2025

*क्या आप सनातनियों को लॉर्ड मैकाले के सनातन विरोधी कुचक्र स्कूलिंग एजुकेशन माफिया से और हेल्थ/ फार्मा माफिया के जंजाल से निकलना चाहते हैं तो कुछ नहीं तो कम से कम सदमार्ग परिवार को*
https://youtube.com/?si=lOBcmWSeUy8861YX
*like, Share & Subscribe कर ही सकते हैं*
Youtube/Sadmarg Parivar
Facebook/ Sadmarg Parivar
Instagram/ Sadmarg Parivar

Sadmarg Welness हमारा उद्देश्य-लक्ष्य: सर्वे भवन्तु व वसुधैव कुटुम्बकम से ओतप्रोत भारतीय सनातन दर्शन संस्कृति के वैज्ञानि....

13/12/2025

🚩 सदमार्ग इंटरनेशनल ट्रस्ट (सदमार्ग परिवार) 🚩
(स्थापना 1990)
महासचिव: डॉ. प्रीति शर्मा
सदमार्ग इंटरनेशनल ट्रस्ट का उपनाम सदमार्ग परिवार है।
हमारा उद्देश्य और लक्ष्य: सदमार्ग परिवार/सदमार्ग इंटरनेशनल ट्रस्ट का उद्देश्य "सर्वे भवंतु सुखिनः" और "वासुदेव कुटुंबकम्" से ओतप्रोत भारतीय दर्शन और संस्कृति के वैज्ञानिक पक्ष का विश्व भर में प्रचार-प्रसार कर प्राणी मात्र के कल्याण के लिए कार्य करना है।
हमारा सर्वोच्च मिशन बहुत स्पष्ट है:
> सनातन विद्या परिषद् / सनातन शक्तिपीठम् का एकमात्र उद्देश्य है कि "विश्व के शीर्षस्थ पदों को शुद्ध सनातनी युवा सुशोभित करें।"
>
🎯 युवा नेतृत्व विकास: पंच-सूत्रीय कार्यक्रम
यह मिशन देवस्वरूप सनातनी सज्जनों के माध्यम से इन पाँच बिंदुओं पर केंद्रित है:
* ऋषिकुल: जिला स्तर पर सम्पन्न मंदिरों में आवासीय/अंशकालिक शुद्ध सनातनी ऋषिकुल चलाना।
* संस्कार केंद्र: हर गाँव/मोहल्ले में एकल आचार्य संस्कार केंद्र स्थापित करना।
* केंद्रीय प्रबंधन: मेधावी शिष्यों के डेटा का सनातन शक्तिपीठम् केंद्रीय कार्यालय से प्रबंधन।
* अभ्यास शिविर: राष्ट्रीय स्तर तक धर्मबोध अभ्यास वर्ग शिविर द्वारा शिष्यों में नेतृत्व क्षमता विकसित करना।
* अर्थ संग्रह: मिशन हेतु लक्ष्मी कुबेर अर्थ संग्रह समिति का संचालन।
💰 सहयोग एवं योगदान के लिए बैंक विवरण
आप इस महान मिशन में अपना आर्थिक सहयोग दे सकते हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| खाता नाम: | Sadmarg International Trust |
| बैंक का नाम: | PNB (पंजाब नेशनल बैंक), ऋषिकेश |
| खाता संख्या (A/c No.): | 3907000103178379 |
| IFSC कोड: | PUNB0390700 |
🏫 हमारी नींव: शिक्षा और ज्ञान
| केंद्र | कार्यरत | विवरण |
|---|---|---|
| शिवालिक ऋषिकुल | 1996 से | कैथल, हरियाणा में सनातन धर्म ज्ञान विज्ञान संस्कार युक्त शिक्षा। (📞 9017229687) |
| सदमार्ग पत्रिका | 2006 से | सनातन धर्म के वैज्ञानिक पक्ष का प्रकाशन। |
📍 संपर्क एवं मुख्यालय
* मुख्यालय (ऋषिकेश):
* सनातन विज्ञान भवन
* गली नंबर 28 ए, अजय हुंडई कार शोरूम के पास, अमितनगर गुमानीवाला, ऋषिकेश, उत्तराखंड।
* सनातन विद्या परिषद्/सनातन शक्तिपीठम्: सिमला रोड, नहर के पास, भाना ब्राह्मनान, नरवाना, जींद, हरियाणा - 126116
* सदमार्ग परिवार संपर्क: +91-9253229687
हमारा आह्वान: सदमार्ग की ओर बढ़ें, इस महान मिशन में अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें, और विश्व नेतृत्व में सनातनी युवाओं को आगे बढ़ाएं!

Address

Sadmarg International Trust, Gumaniwala
Rishikesh
249204

Telephone

09215229687

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Uttarakhand Darshan -एक बार आयें बार-2 आयेगें posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Hotel

Send a message to Uttarakhand Darshan -एक बार आयें बार-2 आयेगें:

Shortcuts

Share